EV Myths vs Reality: वर्ष 2025 भारत के ऑटोमोटिव सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक बदलाव का दौर है। पेट्रोल और डीज़ल कारों के लंबे वर्चस्व के बाद अब इलेक्ट्रिक वाहन तेज़ी से आम लोगों की पसंद बनते जा रहे हैं। बढ़ती ईंधन कीमतें और स्मार्ट मोबिलिटी की सोच ने उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रिक विकल्पों की ओर मोड़ा है। EV Myths vs Reality की बहस इसलिए ज़रूरी हो जाती है, क्योंकि आज भी इलेक्ट्रिक कारों को लेकर कई गलतफहमियाँ लोगों के मन में मौजूद हैं। Tata Motors, MG Motor और Mahindra जैसी कंपनियों ने इन भ्रांतियों को तोड़ने में अहम भूमिका निभाई है।
EV Myths vs Reality: क्या इलेक्ट्रिक कारों की रेंज कम होती है?
इलेक्ट्रिक कारों को लेकर सबसे आम भ्रम यह है कि वे लंबी दूरी के लिए उपयुक्त नहीं हैं। वास्तविकता यह है कि भारत में औसतन एक निजी कार प्रतिदिन 30 से 50 किलोमीटर ही चलती है, जबकि 2025 की अधिकतर इलेक्ट्रिक कारें एक बार चार्ज करने पर 300 किलोमीटर से अधिक की वास्तविक रेंज देती हैं। Tata Nexon EV जैसी कारें शहर और हाईवे दोनों परिस्थितियों में आराम से इस्तेमाल की जा सकती हैं। रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग तकनीक के कारण ट्रैफिक में EV की रेंज और भी बेहतर हो जाती है, जिससे रेंज एंज़ायटी अब केवल एक मिथक बनकर रह गई है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की असल स्थिति

कई लोग मानते हैं कि इलेक्ट्रिक कार चार्ज करना मुश्किल है और चार्जिंग स्टेशन नहीं मिलते। लेकिन EV Myths vs Reality का सच यह है कि 2025 तक भारत में 29,000 से अधिक सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हैं और यह नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है। अधिकतर EV मालिक अपनी गाड़ी को घर पर ही रात में चार्ज करते हैं, जिससे सुबह फुल चार्ज मिल जाता है। DC फास्ट चार्जर से लंबी यात्रा के दौरान 30 से 40 मिनट में कार को पर्याप्त चार्ज किया जा सकता है। भारत सरकार की PM E-DRIVE योजना ने चार्जिंग नेटवर्क को और मजबूत किया है।
क्या इलेक्ट्रिक कारें सच में महंगी हैं?
शोरूम कीमत देखकर यह लग सकता है कि EV महंगी है, लेकिन कुल स्वामित्व लागत को देखें तो सच्चाई अलग है। पेट्रोल कार की तुलना में इलेक्ट्रिक कार की रनिंग कॉस्ट लगभग 7–8 गुना कम होती है। सालाना 10,000 किलोमीटर चलाने पर EV से लगभग 75,000 रुपये तक की बचत संभव है। इसके अलावा, कम रखरखाव, 5% GST और कई राज्यों में रोड टैक्स छूट इलेक्ट्रिक कारों को आर्थिक रूप से कहीं अधिक समझदारी भरा विकल्प बनाती है। यही वजह है कि EV Myths vs Reality में “महंगी EV” वाला तर्क टिक नहीं पाता।
बैटरी लाइफ और वारंटी की सच्चाई
अक्सर लोग सोचते हैं कि EV की बैटरी जल्दी खराब हो जाती है और बदलना बहुत महंगा पड़ता है। वास्तविकता यह है कि भारत में ज़्यादातर इलेक्ट्रिक कारें LFP बैटरी तकनीक के साथ आती हैं, जो लंबी उम्र और बेहतर सुरक्षा देती है। 2025 में Tata Motors द्वारा कुछ मॉडलों पर दी गई लाइफटाइम बैटरी वारंटी ने इस डर को लगभग खत्म कर दिया है। आधुनिक EV बैटरियां 3 से 5 लाख किलोमीटर तक चलने में सक्षम होती हैं।
बारिश, पानी और आग को लेकर डर
भारत जैसे देश में बारिश और जलभराव एक बड़ी चिंता होती है। EV Myths vs Reality के अनुसार, इलेक्ट्रिक कारें इस मामले में पेट्रोल कारों से ज़्यादा सुरक्षित हैं। EV बैटरियां IP67 रेटिंग के साथ आती हैं, जिससे वे पानी और धूल से पूरी तरह सुरक्षित रहती हैं। आग लगने की घटनाओं को लेकर भी आंकड़े बताते हैं कि पेट्रोल और डीज़ल कारों में आग लगने की संभावना EV की तुलना में कहीं अधिक होती है।
इलेक्ट्रिक कारों की रीसेल वैल्यू
पहले इलेक्ट्रिक कारों की रीसेल वैल्यू को लेकर संदेह था, लेकिन 2025 में स्थिति बदल चुकी है। सेकेंड हैंड मार्केट में EV की मांग बढ़ रही है और Tata Nexon EV जैसी कारें 3–4 साल बाद भी 55–60% तक मूल्य बनाए रख रही हैं। लंबी बैटरी वारंटी और कम रनिंग कॉस्ट सेकेंड हैंड खरीदारों के लिए EV को आकर्षक बनाती है।
निष्कर्ष
EV Myths vs Reality का पूरा विश्लेषण यह साफ करता है कि इलेक्ट्रिक कारों को लेकर फैले ज़्यादातर भ्रम अब पुराने हो चुके हैं। रेंज, चार्जिंग, कीमत, बैटरी और सुरक्षा—हर पहलू में EV तकनीक परिपक्व हो चुकी है। यदि आपकी रोज़ की ड्राइविंग सीमित है और आप लंबे समय के लिए किफायती व आधुनिक विकल्प चाहते हैं, तो इलेक्ट्रिक कार आज के समय में एक समझदारी भरा निर्णय है। मिथकों को छोड़िए और तथ्यों पर भरोसा कीजिए, क्योंकि भविष्य निस्संदेह इलेक्ट्रिक है। ⚡🚗


